एक कहानी में एक आदमी का साथी किसी दूसरी दुनिया के एक टीवी शो का हिस्सा है।
दूसरी कहानी में एक बुज़ुर्ग विधवा एक मशहूर कंप्यूटर प्रोग्राम को आत्महत्या के लिए मना लेती है।
तीसरी में एक नाराज़ गिलहरी एक शादी बर्बाद कर देती है।
यह गाब्रिएल गार्सिया मार्केज़ का जादुई यथार्थवाद नहीं है। यह काफ्का की गहरी उदासी भी नहीं है। यह कुछ और है – हल्का भी, गहरा भी, हँसाने वाला भी और अचानक कहीं बहुत अंदर चुभ जाने वाला भी।
यह एटगर केरेट हैं।
और दुनिया के 46 देशों में – 41 भाषाओं में – लाखों पाठक उन्हें इसीलिए पढ़ते हैं।
एक लेखक जो किसी साँचे में नहीं आता
एटगर केरेट का जन्म 1967 में इज़रायल के रामत गान में हुआ। वे एक ऐसे परिवार में पले-बढ़े जो नाज़ी काल के नरसंहार से बचकर आया था। यह पृष्ठभूमि उनके लेखन में कहीं न कहीं हमेशा मौजूद है – एक ऐसी पीढ़ी की संतान जिसने सबसे बड़ा दर्द देखा, लेकिन उस दर्द को आगे जीवन में भी ढोते रहे।
केरेट ने लिखना तब शुरू किया जब उनके सबसे करीबी दोस्त ने उस सैनिक छावनी में आत्महत्या कर ली जहाँ वे दोनों फ़ौजी सेवा कर रहे थे। यह शुरुआत ज़रूरी है – क्योंकि यह बताती है कि केरेट का लेखन महज़ शौक से नहीं उपजा। यह किसी गहरी, भीतरी ज़रूरत से आया।
इज़रायली साहित्य के बड़े नामों – आमोस ओज़ और डेविड ग्रॉसमैन से खुद को अलग करते हुए केरेट ने कहा था, “उनके किरदार हमेशा मुझसे बेहतर लगते थे – ज़्यादा मज़बूत, ज़्यादा बड़े। मैं उनसे खुद को जोड़ नहीं पाता था।”
इसीलिए उन्होंने अलग रास्ता चुना। उन्होंने आम आदमी को उसकी सारी कमज़ोरियों, उसके छोटे-छोटे डरों, उसकी रोज़मर्रा की उलझनों समेत – अपनी कहानियों का केंद्र बनाया।
चार पन्नों में पूरी एक दुनिया
केरेट की कहानियाँ शायद ही कभी चार पन्नों से आगे जाती हैं। वे अजीब को साधारण के साथ मिलाते हैं और एक ऐसी दुनिया का दरवाज़ा खोलते हैं जो एक साथ अंधेरी भी है और हास्यपूर्ण भी।
यह उनकी सबसे बड़ी ख़ासियत है।
अधिकतर लेखक या तो गंभीर होते हैं या मज़ेदार। केरेट दोनों एक साथ हैं। एक ही कहानी में आप हँसते हैं – और फिर अचानक रुक जाते हैं। कुछ अटक जाता है भीतर। एक वाक्य जो हल्का लगा था, देर तक पीछा करता है।
उनकी लिखावट सीधी और सपाट है – रोज़मर्रा की भाषा, बोलचाल और आम बोली का इस्तेमाल। कोई भारी-भरकम शब्द नहीं। कोई लंबी भूमिका नहीं। वे सीधे कहानी के बीच में कूद जाते हैं और पाठक को भी साथ खींच ले जाते हैं।
एक आलोचक ने कहा था – “उनकी कहानियाँ छोटी और धारदार हैं। उनकी प्रेरणा साहित्य और रंगमंच नहीं, बल्कि फ़िल्में, वीडियो और चित्रकथाएँ हैं।”
यही कारण है कि उनकी कहानियाँ किसी भी उम्र के पाठक को पकड़ लेती हैं।
जो बेतुका लगे – वही सबसे सच निकले
केरेट की कहानियाँ देखने में अजीब हैं। उनमें दूसरी दुनियाएँ हैं, दूसरे ग्रहों के प्राणी हैं, मशीनी दिमाग़ हैं, गिलहरियाँ हैं जो शादियाँ बर्बाद करती हैं।
लेकिन यह सब दरअसल भागने की जगह नहीं है। यह असल जीवन की एक और परत है।
जब केरेट एक ऐसे आदमी की कहानी लिखते हैं जिसकी पत्नी के नाम का तारा धरती से टकराने वाला है – तो वे दरअसल प्यार, पछतावे और बेबसी की बात कर रहे होते हैं। जब वे एक मशीनी दोस्त की कहानी लिखते हैं – तो वे अकेलेपन और जुड़ाव की बात कर रहे होते हैं।
केरेट ज़िंदगी की सबसे छोटी, सबसे साधारण घटनाओं को इस तरह उठाते हैं कि वे गहरी और अनोखी दोनों बन जाती हैं।
जब उन पर यह आरोप लगाया गया कि उनकी कहानियाँ सिर्फ़ सतही हैं, उन्होंने कहा – “मेरा लेखन विचारों से भरा है। लेकिन इज़रायल में जब लोग विचार या नैतिकता की बात करते हैं तो हमेशा राजनीति की बात करते हैं। और मुझे लगता है कि विचार और नैतिकता, राजनीति से बहुत ज़्यादा है।”
यही बात उन्हें उनके समकालीनों से अलग करती है।
वे क्यों पढ़े जाते हैं – असली कारण
केरेट अपनी कहानियों को एक ख़ास परिवेश से उठाकर सबकी कहानी बना देते हैं।
एक इज़रायली की कहानी – एक जर्मन की कहानी बन जाती है। एक बाप-बेटे की कहानी – हर किसी की कहानी बन जाती है।
पाठक उन्हें इसीलिए पसंद करते हैं क्योंकि वे बड़ी से बड़ी भावना को चंद पन्नों में समेट लेते हैं। हँसी और दर्द का वह मेल – जो एक ही पन्ने पर दोनों काम करता है।
और सबसे ज़रूरी – उनके किरदारों की परेशानियाँ हमारी अपनी परेशानियों जैसी हैं। काम की, रिश्तों की, अकेलेपन की। वे एक ऐसी दुनिया में जीते हैं जहाँ तकनीक लगातार बढ़ रही है – लेकिन इंसान अभी भी वैसा ही है जैसा हमेशा से था।
यह आज के समय का सच है। और केरेट इसे कहानियों में इस तरह पकड़ लेते हैं जो किसी लंबे लेख से कहीं ज़्यादा असरदार है।
ऑटोकरेक्ट – उनकी सबसे नई किताब
ऑटोकरेक्ट में केरेट की दुनिया में सब कुछ मुमकिन है – एक आदमी योग की कक्षा में जाता है जो सच में उसकी ज़िंदगी बदल देती है। एक बेटे को अपने पिता के साथ एक ज़रूरी पल दोबारा जीने का मौका मिलता है। एक अंतरिक्ष यात्री टूटी हुई धरती का सफ़र कराता है।
इस किताब में हँसी के साथ-साथ कुछ और भी है। यह उस दुनिया की कहानी है जहाँ हमेशा न्याय नहीं होता – जहाँ बुरे लोगों के साथ बुरा हो, यह ज़रूरी नहीं। केरेट की दुनिया में ऐसी कोई गारंटी नहीं। और यही इसे ज़्यादा सच्चा बनाता है।
ये कहानियाँ हमारे इस वक़्त से बात करती हैं – अनिश्चितता से, ग़लतफ़हमियों से, टूटे रिश्तों से। लेकिन साथ ही उम्मीद और ताक़त ढूँढने की कोशिश से भी।
न्यूयॉर्क टाइम्स ने केरेट को एक शब्द में कहा है – “प्रतिभाशाली।”
हिंदी पाठक के लिए केरेट क्यों ज़रूरी हैं?
हिंदी में लघुकथा की एक गहरी परंपरा है – मंटो, प्रेमचंद, निर्मल वर्मा। लेकिन केरेट जो करते हैं वह इससे बिल्कुल अलग है।
वे एक ऐसी दुनिया में लिखते हैं जो इंटरनेट और मोबाइल के बाद की है – जहाँ इंसान और मशीन के बीच की लकीर धुंधली हो रही है। जहाँ अकेलापन हर जगह है। जहाँ हर कोई किसी न किसी उलझन में फँसा है।
यह दुनिया हिंदी पाठक की भी दुनिया है।
और जब आप केरेट को पढ़ते हैं – चार पन्नों में – तो समझ आता है कि साहित्य इतना बड़ा और भारी होना ज़रूरी नहीं। एक छोटी सी कहानी अगर सही जगह चुभे तो वह किसी बड़े उपन्यास से ज़्यादा देर तक याद रहती है।
अगर आप एटगर केरेट को हिंदी में पढ़ना शुरू करना चाहते हैं –
ऑटोकरेक्ट – एटगर केरेट की नवीनतम कहानियाँ, हिंदी में AAS Publishers पर उपलब्ध हैं|

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