ऑटोकरेक्ट और अन्य कहानियां

Etgar Keret (एटगर केरेट)

Translated by अक्षत और शहादत

Language: हिब्रू से अनुवाद

Paperback 208 pages

Published 15th March 2026

350

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लेखक की प्रशंसा

“एटगर केरेट एक जीनियस हैं…” — द न्यूयॉर्क टाइम्स

“एक शानदार लेखक… मैं ऐसे किसी और लेखक को नहीं जानता। आने वाली पीढ़ी की आवाज़।” — सलमान रुश्दी

“केरेट केवल छह पैराग्राफ़ में वो कर सकते हैं, जो अधिकांश लेखक छह सौ पन्नों में नहीं कर पाते।” — काइल स्मिथ, पीपल

“वो हमारे समय के सबसे महत्वपूर्ण लेखकों में से एक हैं…” — क्लाइव जेम्स

 

किताब की प्रशंसा

“सार्वभौमिक और शाश्वत” — द न्यूयॉर्क टाइम्स

“केरेट के नए संग्रह की कहानियां व्यक्तिगत और वैश्विक घटनाओं पर ऐसी प्रतिक्रिया देती हैं, जो एक साथ हास्यपूर्ण और गहराई से भावनात्मक है।”
— द न्यू यॉर्कर

“रोशन और सटीक, सीधे-साधे अंदाज़ में लिखी गईं, लेकिन भीतर संभावनाओं और जंगलीपन से भरी हुई… केरेट की चमकदार कल्पनाएं हमेशा वास्तविकता की खोज में होती हैं, हमें यह दिखाने के लिए कि हम एक-दूसरे से कैसे जुड़ते हैं, कैसे अकेले रह जाते हैं और कैसे जुड़ने की तड़प रखते हैं।” — एमी बेंडर

“अनंत कल्पनाशीलता… छोटी-छोटी गद्य-रचनाएं— ज़्यादातर कुछ ही पन्नों की— जो छोटे तारों की तरह फूटती हैं और कल्पनात्मक विस्तार को बढ़ावा देती हैं।” — बुकलिस्ट

“केरेट के इस मनोरंजक संग्रह की 33 कहानियां हमारे समय के बेतुकेपन, चिंताओं और विडंबनाओं को उजागर करती हैं… ये लघुचित्र साथ मिलकर एक चौंकाने वाली गहराई का जीवंत ताना-बाना बुनते हैं।” — पब्लिशर्स वीकली

“समकालीन चिंताओं को समझती व्यंग्यपूर्ण कहानियों का एक दिलचस्प संग्रह… इसकी सबसे प्रभावशाली बात यह है कि ख़तरनाक-से-ख़तरनाक समस्याओं के बीच भी पात्र अपनी मानवता को बचाए रखने के लिए अडिग हैं। ये कहानियां केरेट की विशिष्ट शैली, यानी करुणा और व्यंग्य के संगम से जन्मी हैं।” — कर्कस रिव्यूज़ (स्टार रिव्यू)

“कहानियां बेहद छोटी हैं। हालांकि, इन्हें पढ़कर और ज़्यादा पढ़ने का मन करता है। हमें यक़ीन है कि केरेट की असीम रचनात्मकता और उनके हास्य से फिर जल्दी ही भेंट होगी।” — द टाइम्स ऑफ़ इज़रायल

“लघु कहानी के उस्ताद केरेट अपने शिल्प को शाब्दिक अर्थ में बरतते हैं— उनकी कहानियां सचमुच ‘लघु’ होती हैं। ज़्यादातर कहानियां कुछ ही पन्नों में सिमटी हैं। लेकिन उनकी संक्षिप्तता या हास्य को हल्के में न लें— कुछ कहानियां इतनी तीखी हैं कि जैसे कोई अनजान राहगीर पेट में मुक्का मारकर चला गया हो। इन कहानियों की पृष्ठभूमि 7 अक्तूबर के हमलों और ग़ज़ा युद्ध की छाया में विस्तार पाती हैं।” — एन.पी.आर.

“यह सही है कि इन कहानियों में हास्य और सोचने की गुंजाइश दोनों हैं। वे ‘डार्क कॉमेडी’ कही जा सकती हैं। लेकिन यह किताब इससे आगे जाती है। डार्क कॉमेडी के कार्यों में भी हमको अक्सर एक तरह की न्याय प्रणाली का आभास होता है, जिसे कभी-कभार कर्मफल के रूप में वर्णित किया जाता है। यह किताब इस ढांचे के बाहर जीने की हिम्मत रखती है।” — शिकागो रिव्यू ऑफ़ बुक्स

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ऑटोकरेक्ट और अन्य कहानियां

Etgar Keret (एटगर केरेट)

बिना सेल्फ़ी-स्टिक की दुनिया

 

पीछे मुड़कर देखें तो मुझे नॉट-डेब्बी पर चिल्लाना नहीं चाहिए था। डेब्बी ख़ुद हमेशा कहती थी कि चिल्लाने से कुछ हल नहीं होता। लेकिन कोई करे भी तो क्या? अगर आपने अपनी प्रेमिका को हवाई-अड्डे पर रोते-धोते अलविदा कहा हो क्योंकि वह पीएचडी करने ऑस्ट्रेलिया जा रही है, और उसके हफ़्ते-भर बाद ही आप उससे ईस्ट विलेज के स्टारबक्स में टकरा जाए, तो आप और क्या करेंगे?

मैंने जब उसे कॉफ़ी शॉप में देखा तो वह बरिस्ता को दूध के विकल्पों के बारे में सवाल करके खिजा रही थी। मेरे पूछने पर कि बिना बताए वह न्यूयॉर्क कैसे वापस आ सकती है, उसने मुझ पर रूखी-सी नज़र डाली और बेसाख्ता बोली, “भाईसाहब, मैं आपको नहीं जानती। आप शायद किसी और को ढूंढ़ रहे हैं।”

तब मैंने आपा खो दिया। लगभग तीन साल साथ बिताने के बाद मैंने थोड़े और सभ्य बर्ताव की उम्मीद की थी। इसलिए जब उसने कहा कि वह मुझे नहीं जानती तो उसके साथ बहस करने की बजाय मैं स्टारबक्स के बीचों-बीच खड़ा होकर उसके बारे में वे सभी निजी बातें चिल्ला-चिल्लाकर बताने लगा जो मुझे पता थीं। जैसे हमारी योसेमिटी की यात्रा पर गिर जाने से उसकी पीठ पर जो घाव बना था और उसकी बायीं बगल पर जो तिल था। नॉट-डेब्बी ने कोई जवाब नहीं दिया। कॉफ़ी शॉप के दो कर्मियों ने मुझे धक्के मारकर बाहर निकाल दिया और वह बस मेरी ओर हैरानी से देखती रही।

मैं सड़क पर एक बेंच पर बैठकर रोने लगा। पांच हफ़्ते पहले जब डेब्बी ने मुझे बताया था कि वह ऑस्ट्रेलिया शिफ्ट हो रही है, तब मुझे सदमा लगा था। मगर मुझे अहसास भी हुआ था कि हमारा बिछड़ना अपरिहार्य है : सिडनी यूनिवर्सिटी ने पीएचडी के लिये उसका ग्रांट पास कर दिया था और मुझे भी हाल ही में देश की एक नामी और तेज़ी से उभरती बिग डेटा स्टार्ट-अप में टीम हेड बना दिया गया था। सच कहूं तो हमारा बिछड़ना दर्दनाक तो था, लेकिन स्टारबक्स में हुई रूखी मुलाक़ात की तरह बेरहम और अपमानजनक नहीं।

एकाएक मुझे अपने कंधे पर किसी के नरम स्पर्श का अहसास हुआ। मैंने जब मुँह उठाकर देखा तो नॉट-डेब्बी को अपने पास खड़ा पाया। “एक बात साफ़ कर लेते हैं,” उसने धीमे से कहा, “हो सकता है कि मैं उसकी जैसी दिखती हूं, और मेरे भी वहीं तिल हो जहां उसका है, लेकिन मैं वो नहीं हूं। सच में!”

नॉट-डेब्बी और मैं थर्ड एवेन्यू के एक दूसरे कैफ़े में चले गए। उसने अपने लिए कम कॉफ़ी और ज़्यादा दूध वाली कैपेचीनो मंगाई, बिल्कुल वैसी ही जैसी डेब्बी मंगाया करती थी। फिर मेरी तरफ़ सवालिया निगाहों से उसी तरह देखा जैसे डेब्बी देखा करती थी। फिर वह मुझे मेरी ज़िंदगी की सबसे अनोखी कहानी सुनाने लगी। मालूम पड़ा कि नॉट-डेब्बी का नाम भी असल में डेबोराह था, लेकिन वह उस सुबह ऑस्ट्रेलिया से न्यूयॉर्क नहीं आयी थी।

वह एक समानांतर दुनिया से आयी थी। मैं मज़ाक़ नहीं कर रहा। उसने अपनी दूध वाली कॉफ़ी पीते-पीते मुझसे यही कहा। वह किसी एलियन हमले या सैन्य वैज्ञानिक प्रयोग में हुई ग़लती का नतीजा नहीं थी। वह यहां टीवी पर दिखाये जाने वाले एक गेम शो में प्रतियोगी के रूप में भाग लेने आयी थी। उस शो का नाम vive la différence था, यानी ‘अंतर की जय हो’। और वह उसके वैकल्पिक ब्रह्मांड का सबसे लोकप्रिय प्रोग्राम था।

शो में पांच प्रतिद्वंदियों को अलग-अलग ब्रह्मांडों में भेजा जाता है। उन सभी ब्रह्मांडों में वह सब कुछ होता है, जो उनकी मूल दुनिया में है। सिवाय एक चीज़़ के। यही पूरा गेम है, यानी उस एक चीज़़ को ढूंढ़ना, जो उनकी ख़ुद की दुनिया में है मगर उस दुनिया में नहीं है जिसमें उन्हें भेजा गया है। सभी प्रतिद्वंदियों पर पूरे वक़्त कैमरे की निगाह होती है और हर कोई अपने विशेष चैनल पर दिखाई देता रहता है। जो प्रतिद्वंदी सबसे पहले ग़ायब वस्तु का पता लगाकर ज़ोर से उसका नाम बोल देता है, वह अपनी दुनिया के टीवी स्टूडियो में तुरंत वापस पहुंच जाता है।

वहां उसका स्वागत गेम देखने वालों की बधाइयों और दस लाख डॉलर के इनाम से होता है। प्रतियोगिता को और रोमांचक बनाने के लिए यह भी तय किया गया है कि बाक़ी प्रतिद्वंदियों को अपनी बची हुई ज़िंदगी उन दूसरे ब्रह्मांडों में ही बितानी पड़ेगी, जहां उन्हें भेजा गया है। उनको कभी यह भी नहीं पता चलेगा कि वे हार गए हैं या गेम चल रहा है। मुझे लगा कि हारने वालों को तो काफ़ी बड़ी क़ीमत चुकानी पड़ रही है। नॉट-डेब्बी ने बताया कि उसे इसकी कोई परवाह नहीं है, क्योंकि उसका पिछला बॉयफ्रेंड एक नंबर का कमीना है और उसने अपने माता-पिता से कई सालों से बात तक नहीं की है।

यह सब इतना नायाब था कि मुझे लगा झूठ नहीं हो सकता और फिर नॉट-डेब्बी इतनी सादगी से यह सब बता रही थी कि मुझे उसका यक़ीन करना ही पड़ा। उसने बताया कि पिछले साल का विजेता घाना से आया प्रवासी था, जिसने पाया कि जिस वैकल्पिक ब्रह्मांड में उसे भेजा गया है, वहां पर गुम वस्तु सेल्फ़ी-स्टिक है।

“साली, सेल्फ़ी स्टिक, क्या तुम सोच सकते हो?” नॉट-डेब्बी ने कहा, “मैं कभी नहीं ढूंढ पाती।”

मैंने उससे कुछ और सवाल पूछे। मालूम हुआ कि डेब्बी की तरह नॉट-डेब्बी ने भी क्लिनिकल साइकोलॉजी की पढ़ाई की थी, लेकिन उसे डॉक्टर बनने या पीएचडी करने में कोई दिलचस्पी नहीं थी। इसी कारण अब वह न्यूयॉर्क के किसी अमीर कॉलेज में प्रशासनिक नौकरी में फंसी हुई है। मैंने उसे अपने और डेब्बी के बिछड़ने के बारे में बताया। कैसे मैं उसके साथ पिछले हफ़्ते हवाई अड्डे गया था और कैसे तब तक वहीं खड़ा रहा, जब तक उसका जहाज़ ऑस्ट्रेलिया के लिए उड़ न गया। उसने हामी में सिर हिलाकर कहा कि उसे समझ आ रहा है।

प्रतिद्वंदियों को कभी धरती के उस गोलार्द्ध में नहीं भेजा जाता है जहां उनके समानार्थी रहते हैं। अगर डेब्बी सिडनी न गई होती तो उसे बुएनोस आयर्स या ऑकलैंड भेजा गया होता। “मैं तो ख़ुश हूं कि वो चली गई,” उसने कहा। उसकी मुस्कान बिल्कुल वैसी थी, जिसकी वजह से मुझे ढाई साल पहले डेब्बी से प्यार हुआ था। “ऑकलैंड के बारे में कुछ बुरा नहीं कहूंगी, लेकिन न्यूयॉर्क से बेहतर कुछ नहीं।”

हमने कॉफ़ी पी ली तो नॉट-डेब्बी ने आगे बढ़कर पैसे दे दिये और इससे पहले कि हम अपने-अपने रास्ते जाते, मैंने सुझाव दिया कि इनाम जीतने में मैं उसकी मदद कर सकता हूं। यानी वह चीज़़ ढूंढ़ने में जो उसकी दुनिया में है, पर हमारी दुनिया में नहीं है। नॉट-डेब्बी को कम समय में ज़्यादा-से-ज़्यादा जानकारी की ज़रूरत थी। चूंकि मैं पेशेवर तौर पर कंप्यूटर्स से जुड़ा हुआ था और डेटाबेस के साथ काम करना मेरी विशेषता थी, मैं उसकी मदद कर सकता था।

मैंने जब उसे हिचकिचाते देखा तो फ़ौरन अपना प्रस्ताव वापस लेते हुए कहा कि अगर किसी की मदद लेना या कंप्यूटर का इस्तेमाल करना नियमों के ख़िलाफ़ है तो… लेकिन नॉट-डेब्बी ने मुस्कुराकर मुझे रोक दिया और बोली, “ऐसा नहीं है। बस मुझे तुम्हें इस पूरी उलझन में नहीं घसीटना। आख़िर ऐसा तो नहीं है कि मैं महज़ एक लड़की ही हूं, जिससे तुम पहले कभी नहीं मिले।”

मैंने उसे आश्वासन दिया कि इसमें कुछ भी उलझन नहीं है। हालांकि मैं डेब्बी के साथ ढाई साल से था, वह तो नॉट-डेब्बी है और हम तो आज ही मिले हैं। अगर उसे कोई आपत्ति न हो तो मुझे उसकी मदद करने में ख़ुशी होगी। क्या पता, शायद इस प्रक्रिया में मैं वैकल्पिक ब्रह्मांड में टीवी स्टार बन जाऊं।

लगातार नौ घंटों तक सारे तकनीकी, भौगोलिक और खाने के डेटाबेस (आपको यक़ीन नहीं होगा, शो के पहले साल में समानांतर दुनिया में मेपल सिरप नहीं था) छानने के बाद सुबह के चार बजे नॉट-डेब्बी ने कहा कि अब वह अपनी आँखें और खुली नहीं रख सकती। मैंने अपने छोटे से एक कमरे के फ़्लैट में बिस्तर की चादर बदली और वह पलक झपकते ही गहरी नींद में सो गई। मैं बैठा और उसे सोते हुए देखने लगा। बड़ा अजीब था लेकिन मुझे लगा कि उन नौ घंटों में मैंने उसके बारे में उससे ज़्यादा जान लिया था, जितना मैं पिछले दो साल और कुछ महीनों में अपनी डेब्बी के बारे में नहीं जान पाया था।

उस गुम वस्तु की खोज में जिन संभावनाओं के बारे में उसने बातें की, उनसे उसके सपनों, इच्छाओं और डरों के बारे में बहुत कुछ मालूम हो गया था। ऐसा नहीं था कि वह डेब्बी जैसी नहीं थी, लेकिन उसके बारे में कुछ अलग भी था : वह खुले मिज़ाज की थी, बहादुर थी, दिलकश और बेक़ाबू भी थी। मुझे नहीं पता उस भाव को क्या कहते हैं, जो आपको ऐसे व्यक्ति के लिए आता है, जो आपकी पूर्व प्रेमिका भी हो और आपसे कभी मिली भी न हो, लेकिन मुझे उससे प्यार हो गया।

नॉट-डेब्बी जब मेरे फ़्लैट में सो रही थी, मेरे इतने क़रीब कि मुझे उसकी शैम्पू की ख़ुश्बू आ रही थी, मैं बाक़ी चार प्रतिद्वंदियों के बारे में भी सोच रहा था, कि कैसे वे उड़ती हुई बिल्लियों, कान साफ़ करने वाले इलेक्ट्रिक यंत्रों, भौहों पर लगाने वाले इत्र, या किसी भी ऐसी चीज़़ की तलाश में जुटे होंगे, जो इस अधूरी दुनिया में नहीं है। मुझे पता था कि अगर उनमें से कोई भी उस चीज़़ को ढूंढ़ लेगा तो नॉट-डेब्बी हमेशा के लिए मेरी हो जाएगी। यही सब सोचते हुए मैंने भी अपनी आँखें बंद कर लीं।

नॉट-डेब्बी ने मुझे दोपहर के एक बजे उठाया तो वह थोड़ी बुझी-सी लग रही थी। उसने मुझे बताया कि पिछले साल के विजेताओं को गुम वस्तु ढूंढने में लगभग 15 घंटे लगे थे। जबकि उसको एक दिन से ज़्यादा हो चुका था। “बस,” उसने कहा, “मुझे लगता है किसी और ने अब तक ढूंढ लिया होगा।”

मैंने उसका हौसला बढ़ाने की कोशिश की। आख़िरकार, ठोस रूप से पता करने का कोई तरीक़ा नहीं था। शायद उसके प्रतिद्वंदी भी खोये-खोये सड़को पर घूम रहे होंगे और उसके जीतने की संभावना अभी भी बाक़ी होगी “शायद,” नॉट-डेब्बी ने कहा, और एकाएक मुस्कुराने लगी, “लेकिन सच तो यह है कि जब से मैं उस शो पर गई तब से मैं हारने के ख़्वाब ही देख रही हूं, जिससे इस दुनिया में एक नयी ज़िंदगी की शुरुआत कर सकूं। शायद यहां मेरी ज़िंदगी पहले से बेहतर और कम दर्दनाक हो।”

मैंने कुछ नहीं कहा। वह मेरी तरफ़ ऐसी निगाहों से देख रही थी जैसे डेब्बी ने कभी नहीं देखा था। “सचमुच,” उसने मेरे चेहरे को अपने हाथों से लेते हुए कहा, “क्या फ़र्क पड़ता है, इस दुनिया में किसी चीज़़ के कम होने से। तुम जो हो यहां।”

बिस्तर में जब मैंने उससे पूछा कि गर्भनिरोधक गोलियां ले रही है तो उसने सिर हिलाकर न कहा और मुस्कुराते हुए बोली कि काश सभी संभावित समानांतर दुनियाओं में वह किसी ऐसी दुनिया में न आ टपकी हो जहां कंडोम नहीं हैं। वह मज़ाक़ कर रही थी, लेकिन यह कहते हुए वह जिस तरह एक सेकंड के लिए हिचकिचायी, उसमें मैं उसके उस डर को देख पाया कि कहीं ऐसा कहने से वह अपनी दुनिया में वापस न चली जाए और हम हमेशा के लिए जुदा हो जायें। सेक्स के बाद जब मैंने सुझाव दिया कि अब हमें खगोल विज्ञान, भू-राजनीति और इतिहास के डेटाबेस देखने चाहिए तो उसने कहा कि वह वैसा करने के बजाय फिर से सेक्स करना पसंद करेगी।

बाद में हम सैर करने सेंट्रल पार्क गये, जहां हमने ठेले से हॉट डॉग ख़रीदकर खाये। नॉट-डेब्बी ने मुझे बताया कि अपनी दुनिया में वह शाकाहारी थी। उसे जानवरों को मारकर खाने में बुरा लगता था, लेकिन यहां इस दुनिया में, जो उसकी अपनी नहीं है, उसे हॉट डॉग खाने में कोई परेशानी महसूस नहीं हो रही। “मैं जीतना नहीं चाहती,” उसने कहा। हम एक तालाब के बग़ल में खड़े थे, “मुझे वापस नहीं जाना। मैं यहीं रहना चाहती हूं, तुम्हारे साथ।” हमने बाक़ी का पूरा दिन शहर में बिताया। हम एक-दूसरे को मैनहैट्टन की अपनी-अपनी पसंदीदा जगहें दिखा रहे थे।

ऐसे ही घूमते-घामते हम ट्रिनिटी चर्च पहुंचे। शाम हो चुकी थी और लाइटों से रोशन चर्च जादुई लग रहा था, किसी असली जगह से ज़्यादा डिज़्नी फ़िल्म के महल जैसा। मैंने उसे बताया कि पहली बार मैं यहां दस साल पहले चलते हुए आया था, जब मैं बस शहर पहुंचा ही था। उस वक़्त ख़ुद से क़सम खायी थी कि अगर मैंने कभी शादी की तो यहीं करूंगा। नॉट-डेब्बी ने हंसते हुए कहा कि चर्च के बारे में यह फ़ैसला लेना अच्छा है, बस अब मुझे ऐसी लड़की खोजने की ज़रूरत है, जो उस चर्च के अंदर मुझसे शादी करने तैयार हो जाये। मैं भी मुस्कुरा दिया। मुझे चूमने के बाद नॉट-डेब्बी ने कहा, “चलो, अंदर चलते हैं, मैं यह देखने के लिए बहुत उत्सुक हूं कि हमारी शादी कहां होने वाली है।”

चर्च उस वक़्त लगभग ख़ाली था। जैसे ही हम अंदर घुसे नॉट-डेब्बी बेचैनी से इधर-उधर देखने लगी, मानो वह किसी चीज़़ की तलाश में हो। मैंने उससे पूछा कि सब ठीक तो है। उसने कहा हां सब ठीक है, बस वह कुछ खोज रही है। मैंने जब उससे फिर पूछा क्या, तो उसने मेरी तरफ़ देखा जैसे मैं कोई मूर्ख हूं और कहा, “भगवान।” फिर उसने जोड़ा, “ये चर्च है न?” मैंने हामी में सिर हिलाया। उसने कहा, “तो फिर वह वापस आते ही होंगे।” मैंने उसको शांत करने की कोशिश की। मैंने कहा कि मैं ख़ुद तो भगवान पर विश्वास नहीं करता, मगर जो लोग करते भी हैं, उनका भी मानना है कि उन्हें देखा नहीं जा सकता।

नॉट-डेब्बी ने धीमे से अपना सिर हिलाया और बोली, “वाह, तो बस यही है! तुम्हारी दुनिया में चर्च हैं, मस्जिद हैं, मंदिर हैं, बिल्कुल वैसे ही जैसे मेरी दुनिया में हैं, लेकिन उनमें असल में कोई भगवान नहीं है। तुम्हें अभी भी समझ नहीं आया? इस दुनिया में भगवा—“ वह उस वाक्य को पूरा नहीं कर पायी, कम-से-कम मेरी दुनिया में तो नहीं।

तब से छह साल बीत चुके हैं। मैं अब भी कभी-कभार सोचने की कोशिश करता हूं कि नॉट-डेब्बी के साथ क्या हुआ होगा, कैसे वह दर्शकों की तालियों की गड़गड़ाहट के बीच जगमगाते स्टूडियो में पहुंचीं होगी। उसे गेम शो के आयोजकों ने मुबारकबाद देने के साथ बताया होगा कि वह दस लाख डॉलर की विजेता है।

कभी-कभी मैं उसे ख़ुश होते देखता हूं, ख़ुशी के आंसू गिराते हुए। लेकिन ज्यादातर वक़्त मैं उसे दुखी ही देखता हूं, स्टूडियो में हर तरफ़ मुझे खोजते हुए। मेरा दिल उसे ख़ुश देखना चाहता है लेकिन मेरा अहं— मेरा अहं कहता है कि जो दिन हमने साथ गुज़ारा था, वह उसके लिए भी उतना ही महत्वपूर्ण था जितना मेरे लिये। उसको मेरे हाथों से फिसले एक साल भी पूरा नहीं हुआ था, जब मैंने डेब्बी से ट्रिनिटी चर्च में शादी कर ली। सिडनी की ज़िंदगी उसे रास नहीं आयी थी और शहर वापस आने के दो महीने बाद हमने अचानक शादी करने का फ़ैसला कर लिया।

उसके साथ सेक्स कभी उतना मज़ेदार नहीं होता, जितना नॉट-डेब्बी के साथ था, लेकिन बुरा भी नहीं होता और परिचित भी है। हमारे दो प्यारे-प्यारे बच्चे हैं, ज़ैक और डेबोराह जूनियर, जिनको हमारी तरह ही बिना भगवान वाली दुनिया में जीना सीखना पड़ेगा।