हिंदी पाठक के पास पढ़ने को बहुत कुछ है – प्रेमचंद, महादेवी वर्मा, निर्मल वर्मा, उदय प्रकाश। यह परंपरा गहरी है और भरी-पूरी है।
लेकिन साहित्य की दुनिया हिंदुस्तान से बहुत आगे तक फैली है। और खुशी की बात यह है कि उस दुनिया के कुछ सबसे बड़े नाम पहले से हिंदी में मौजूद हैं – बस उन्हें ढूँढना पड़ता है।
यह सूची दस ऐसे लेखकों की है जिनकी रचनाएँ हिंदी में पढ़ी जा सकती हैं और जिन्हें हर गंभीर पाठक को एक बार ज़रूर पढ़ना चाहिए।
१. गाब्रिएल गार्सिया मार्केज़ – कोलंबिया
मार्केज़ को बीसवीं सदी का सबसे बड़ा कथाकार माना जाता है। उनका उपन्यास एकाकीपन के सौ वर्ष दुनिया की सबसे महत्त्वपूर्ण किताबों में गिना जाता है – एक ऐसा परिवार जिसकी सात पीढ़ियाँ, एक काल्पनिक गाँव में, जादू और असलियत के बीच जीती हैं।
मार्केज़ की कहानियों में अद्भुत बातें इतनी सहजता से होती हैं कि पाठक को अचरज नहीं होता – एक लड़की हवा में उड़ जाती है, एक मरा हुआ आदमी सालों तक एक गाँव में घूमता रहता है। इसी अंदाज़ को “जादुई यथार्थवाद” कहा जाता है, और मार्केज़ इसके सबसे बड़े नाम हैं।
उनकी किताबें राजकमल प्रकाशन से हिंदी में उपलब्ध हैं।
२. ओरहान पामुक – तुर्की
पामुक तुर्की के लेखक हैं और 2006 में उन्हें साहित्य का नोबेल पुरस्कार मिला। उनका उपन्यास मेरे क़त्ल की दास्तान (मूल नाम – माई नेम इज़ रेड) इस्तांबुल के पुराने चित्रकारों की दुनिया में ले जाता है – कला, धर्म और हत्या की एक रहस्यमयी कहानी।
पामुक अपनी कहानियों में पूरब और पश्चिम के बीच की उलझन को बहुत बारीकी से पकड़ते हैं। उनकी तीन किताबें – मेरे क़त्ल की दास्तान, स्नो और द ब्लैक बुक – पेंगुइन बुक्स से हिंदी में मौजूद हैं।
३. फ़्रांज़ काफ्का – चेकोस्लोवाकिया
काफ्का को आधुनिक साहित्य का सबसे रहस्यमयी नाम कहा जाता है। उनकी कहानियों में एक अजीब, घबराने वाली दुनिया दिखती है – जहाँ एक आदमी एक सुबह उठकर पाता है कि वह कीड़ा बन गया है या एक आम इंसान बिना किसी ग़लती के अदालत के जाल में फँस जाता है।
काफ्का की कहानियाँ पढ़ने के बाद दुनिया को देखने का नज़रिया कुछ बदल जाता है। उनकी कई कहानियों और उपन्यासों के हिंदी अनुवाद वर्षों से उपलब्ध हैं और हिंदी के पाठकों में बहुत पढ़े जाते हैं।
४. पाब्लो नेरुदा – चिली
नेरुदा बीसवीं सदी के सबसे बड़े कवियों में से एक हैं। उन्होंने प्रेम पर भी लिखा और राजनीति पर भी – कभी बेचैन कर देने वाली कविताएँ, कभी कठोर सच्चाई से भरी हुई।
नेरुदा को 1971 में साहित्य का नोबेल पुरस्कार मिला। उनकी कविताओं के कई हिंदी अनुवाद हुए हैं – साहित्य अकादेमी ने भी उनकी कविताओं का एक संकलन रुको, ओ पृथ्वी नाम से प्रकाशित किया है। उनकी कविता पढ़ना यह समझना है कि प्रेम और प्रतिरोध एक ही दिल में कैसे साथ रह सकते हैं।
५. महमूद दरवेश – फ़िलिस्तीन
दरवेश को फ़िलिस्तीन का राष्ट्रीय कवि कहा जाता है। 1948 में जब उनका गाँव तबाह हुआ और परिवार को घर छोड़ना पड़ा, तब वे सिर्फ़ सात साल के थे। यह दर्द उनकी पूरी ज़िंदगी और कविता का केंद्र बन गया।
उनकी एक कविता में बार-बार एक पंक्ति आती है – “लिख लो, मैं एक अरब हूँ।” यह पंक्ति फ़िलिस्तीनी प्रतिरोध का नारा बन गई। दरवेश की कई कविताओं के हिंदी अनुवाद अलग-अलग अनुवादकों ने किए हैं, और वे आसानी से पढ़े जा सकते हैं।
६. ग़स्सान कनफ़ानी – फ़िलिस्तीन
कनफ़ानी को फ़िलिस्तीनी साहित्य का सबसे बड़ा नाम माना जाता है। 1972 में बेरूत में बम से उनकी हत्या कर दी गई – सिर्फ़ 36 साल की उम्र में। लेकिन उनकी कहानियाँ आज भी दुनिया की दर्जनों भाषाओं में पढ़ी जाती हैं।
उनकी ताक़त यह थी कि वे दर्द को सीधे नहीं कहते थे – उसे प्रतीकों में बदल देते थे। एक रेगिस्तान की धूप, एक बच्ची की चोट और पूरे एक देश का दुख उसमें समा जाता।
ग़ज़ा से ख़त और अन्य कहानियाँ – AAS Publishers पर हिंदी में उपलब्ध।
७. एटगर केरेट – इज़रायल
केरेट की कहानियाँ शायद ही कभी चार पन्नों से आगे जाती हैं – लेकिन उनमें इतनी गहराई होती है कि वे देर तक पीछा करती हैं।
एक कहानी में एक आदमी का दोस्त किसी दूसरी दुनिया के टीवी शो में है। दूसरी में एक गिलहरी एक शादी बर्बाद कर देती है। यह सब अजीब लगता है लेकिन इसके भीतर प्यार, अकेलापन और बेबसी जैसी बहुत साधारण भावनाएँ छुपी होती हैं।
केरेट की कहानियाँ दुनिया के 46 देशों में, 41 भाषाओं में पढ़ी जाती हैं।
ऑटोकरेक्ट – एटगर केरेट की नवीनतम कहानियाँ, AAS Publishers पर हिंदी में उपलब्ध।
८. अल्बेर कामू – फ्रांस-अल्जीरिया
कामू ने ज़िंदगी के सबसे बड़े सवालों पर लिखा – ज़िंदगी का कोई मतलब है या नहीं और अगर नहीं है, तो भी इंसान कैसे जिए। उनका उपन्यास द आउटसाइडर एक ऐसे आदमी की कहानी है जो दुनिया के नियमों से बेपरवाह है।
1957 में उन्हें साहित्य का नोबेल पुरस्कार मिला। उनकी सोच ने पूरी दुनिया के लेखकों और पाठकों को प्रभावित किया। उनकी मुख्य किताबों के हिंदी अनुवाद बरसों से भारत में पढ़े जा रहे हैं।
९. लियो टॉल्सटॉय – रूस
टॉल्सटॉय को दुनिया के सबसे बड़े उपन्यासकारों में गिना जाता है। उनकी किताब अन्ना कारेनिना एक स्त्री के प्रेम, समाज और अपने ही मन के बीच की लड़ाई की कहानी है। युद्ध और शांति एक पूरे युग का चित्रण है – परिवार, प्रेम, और युद्ध की विशालता को एक साथ समेटे हुए।
टॉल्सटॉय हिंदी पाठकों के लिए नया नाम नहीं हैं – दशकों से उनकी किताबें हिंदी में पढ़ी जा रही हैं, और आज भी हर बड़े प्रकाशक के पास उनकी कोई न कोई किताब मिल जाएगी।
१०. फ़्योदोर दोस्तोयेव्स्की – रूस
दोस्तोयेव्स्की इंसान के मन की सबसे गहरी और सबसे अंधेरी परतों में उतरते हैं। उनका उपन्यास अपराध और दंड एक ऐसे युवक की कहानी है जो एक हत्या करता है और फिर उस अपराध के बोझ तले उसका मन टूटने लगता है।
दोस्तोयेव्स्की पढ़ना सिर्फ़ एक कहानी पढ़ना नहीं है, यह अपने भीतर के उन सवालों से मिलना है जिनसे हम अक्सर बचते हैं। उनकी प्रमुख किताबें हिंदी में वर्षों से उपलब्ध हैं और आज भी गंभीर पाठकों की पहली पसंद हैं।
इन दस लेखकों को पढ़ना एक शुरुआत है, अंत नहीं।
हर एक नाम के पीछे एक पूरा देश है, एक पूरी भाषा है, एक पूरी सोच है – जिसे अब तक हम अनजाने में नज़रअंदाज़ करते रहे। मार्केज़ को पढ़ने के बाद कोलंबिया का साहित्य खोजने का मन करेगा। दरवेश को पढ़ने के बाद फ़िलिस्तीन की और कविताएँ पढ़ने का मन करेगा।
यही पढ़ने का असली मज़ा है , एक किताब दूसरी किताब का रास्ता खोलती है।
तो इस सूची को अंत मत मानिए। इसे एक दरवाज़ा मानिए।
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