सत्य-विपरीत भारत (UPCOMING)

Meera Nanda (मीरा नंदा)

Translated by अक्षत और शहादत

Language: अंग्रेज़ी से अनुवाद

Category: Tags: , ,

“आज के अवैज्ञानिक माहौल में सुप्रसिद्ध विज्ञान इतिहासकार मीरा नंदा की यह पुस्तक एक आवश्यक हस्तक्षेप है। इसमें उन्होंने वैज्ञानिक तर्क के माध्यम से हिंदू धर्म दर्शन की उन परंपरागत मान्यताओं के असत्य को उजागर किया है, जिन्हें पोस्ट सत्य की अवधारणा से औचित्य प्रदान करने की कोशिश की जा रही है। यह पुस्तक उन सभी को पढ़नी चाहिए जो पिछले वर्षों से भारत मैं फैलती अवैज्ञानिकता और उससे जुड़ी सांप्रदायिकता के विरूद्ध अभियान में शामिल हैं। हिंदी में ऐसी पुस्तक का प्रकाशन विशेष स्वागत योग्य है। आशा है इससे हिंदी पट्टी में व्याप्त अज्ञानता और अंधविश्वास को दूर करने में जरूर मदद मिलेगी।” — आलोक टंडन

“धर्म के हिंसक पहलू को उजागर करते हुए हाल के राजनीतिक और सामाजिक बदलाव पर नज़र डालती हुई यह किताब आने वाली नस्लों को चेतावनी दे रही है की वैज्ञानिक दृष्टि से भटकाव किसी भी समाज के लिए कितना ख़तरनाक साबित होता है।” — गौहर रज़ा


“मीरा नंदा की पुस्तक ‘सत्य-विपरीत भारत : विनाशकाल की नियमावली’ एक अत्यंत रोचक कृति है, जो सत्य, विज्ञान और ज्ञान के वर्तमान संकट तथा उसके उत्तर-सत्य संस्कृति के रूप में उभरते नए रूपों को गहराई से छूती है।” — लल्लन बघेल

Read more...

Reviews

There are no reviews yet.

Be the first to review “सत्य-विपरीत भारत (UPCOMING)”

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Write a product review

सत्य-विपरीत भारत (UPCOMING)

Meera Nanda (मीरा नंदा)

उस देश को आप क्या कहेंगे, जहां प्रधानमंत्री नियमित रूप से मंदिरों के अनुष्ठानों के मुख्य संरक्षक की भूमिका निभाता है? किस तरह का लोकतंत्र है वह, जहां चुनी हुई सत्ता का मुखिया ख़ुद को “भगवान का चुना हुआ औज़ार” बताता है, और किसी की पलक तक नहीं झपकती? उस बहुसंख्यक हिंदू जनता की राजनीतिक मानसिकता को किस नाम से पुकारें, जो प्रधानमंत्री के पद को ईश्वरीय दर्जा दिये जाने पर हर्षोल्लास मनाती है?

अयोध्या में राम मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा किए जाने के बाद भारत को और अधिक सटीक रूप में एक हिंदू राष्ट्र कहा जा सकता है। यहां एक हिंदू सरकार है और अयोध्या का राम मंदिर संसद का तीसरा सदन बन चुका है। या फिर अब्राहम लिंकन के ‘गेटिसबर्ग एड्रेस’ को आधार बनाकर कहें तो “यह सरकार हिंदुओं की, हिंदुओं द्वारा, हिंदुओं के लिए” है। यदि आप अधिक अकादमिक भाषा पसंद करते हैं तो मोदी के नेतृत्व वाले भारत को “एथनिक डेमोक्रेसी” कहा जा सकता है, जो हिंदू बहुसंख्यावाद से वैधता प्राप्त करती है।

अब भारत को उन शब्दों से संबोधित नहीं किया जा सकता जिनसे उसे संविधान में संबोधित किया गया है : एक सम्प्रभु समाजवादी पंथनिरपेक्ष लोकतांत्रिक गणराज्य। भारत अभी भी ‘लोकतांत्रिक’ कहलाता है, क्योंकि यहां अब भी चुनाव होते हैं। इसी के बूते भारतीय ख़ुद को ‘दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र’ और यहां तक कि ‘लोकतंत्र की जननी’ होने का दावा करते हैं। हालांकि, अब वे इस बात का दावा नहीं कर सकते कि वे दक्षिण एशिया के एकमात्र ऐसे देश में रहते हैं, जहां राज्य का कोई धर्म नहीं है और जहां हर धर्म के नागरिकों को समान अधिकार और स्वतंत्रता प्राप्त है। हम अब ‘उस’ भारत में नहीं रहते।

22 जनवरी 2024 वह दिन था जब ‘हिंदू राष्ट्र’ के लिए ‘हिंदू राज’ औपचारिक रूप से स्थापित हुआ। जिस वक्त राम की पत्थर की मूर्ति में प्राण फूंके जा रहे थे, उसी वक्त संविधान के पंथनिरपेक्ष भारत से प्राण बाहर निकल रहे थे।

इस हिंदू राष्ट्र में उस किसी के लिए कोई जगह नहीं है, जो ‘जय श्री राम’ के नारे लगाने से इंकार करता है, जो यह नहीं मानता कि अयोध्या में छीनी गई ज़मीन पर बने मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा ‘दूसरी दीवाली’ है। और यह केवल ग़ैर-हिंदू अल्पसंख्यकों तक सीमित नहीं है, बल्कि उन हिंदुओं के लिए भी यहां कोई जगह नहीं है जो नास्तिक हैं या फिर जो आज भी एक धर्मनिरपेक्ष भारत के विचार के प्रति निष्ठावान हैं।