Meera Nanda (मीरा नंदा)

मीरा नंदा हमारे समय की उन विरल लेखिकाओं और विचारकों में हैं जो विज्ञान और धर्म के रिश्ते को गहराई और साहस के साथ समझती हैं। मूल रूप से जीवविज्ञान की छात्रा रहीं मीरा नंदा ने आगे चलकर विज्ञान-दर्शन में अपना विशिष्ट स्थान बनाया। उनका काम यह पूछता है कि जब विज्ञान को धार्मिक या सांस्कृतिक पहचान के ढांचे में बांध दिया जाता है, तो ज्ञान और सत्य की परिभाषाएं कैसे बदल जाती हैं। उन्हें अमेरिकन काउंसिल ऑफ लर्न्ड सोसाइटीज़ और जॉन टेम्पलटन फाउंडेशन जैसी प्रतिष्ठित संस्थाओं से शोधवृत्तियां प्राप्त हुईं हैं। वह 2009–10 में जेएनयू के जवाहरलाल इंस्टीट्यूट ऑफ़ एडवांस्ड स्टडीज़ में विज़िटिंग फ़ेलो भी रहीं हैं। उनका लेखन अपने समय के निर्णायक सवाल से जूझता है— क्या विज्ञान और आस्था एक साथ खड़े हो सकते हैं, या धर्म के दबाव में विज्ञान अंततः झुक जाता है?

सत्य-विपरीत भारत: विनाशकाल की नियमावली

सत्य-विपरीत भारत: विनाशकाल की नियमावली

Meera Nanda (मीरा नंदा)

अंग्रेज़ी से अनुवाद

350
Non-Fiction
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