Frantz Fanon (फ्रांत्ज़ फ़ैनन)

फ्रांत्ज़ फ़ैनन (1925–1961) बीसवीं सदी के सबसे प्रभावशाली विचारकों, मनोचिकित्सकों और लेखकों में से एक थे। उनका जन्म मार्टीनिक (कैरेबियन) के फ़्रांस-शासित द्वीप पर हुआ, और कम उम्र में ही उन्होंने फ़्रांसीसी उपनिवेशिक सत्ता की नस्लवादी संरचना को समझना शुरू कर दिया। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान उन्होंने फ़्रांसीसी सेना में शामिल होकर फ़ासीवाद के ख़िलाफ़ लड़ाई लड़ी, लेकिन लौटने पर यह देखा कि वही नस्लवाद, वही भेदभाव अब “सभ्यता” के नाम पर कायम है। फ़ैनन ने लियोन (फ़्रांस) में मनोचिकित्सा की पढ़ाई की और फिर अल्जीरिया के ब्लिडा-जोइनविल अस्पताल में काम किया, जहां उन्होंने मानसिक रोग और उपनिवेशिक उत्पीड़न के बीच का गहरा रिश्ता समझा। वहीं से उनकी बौद्धिक यात्रा शुरू हुई, जिसने उन्हें डॉक्टर से दार्शनिक, और दार्शनिक से क्रांतिकारी बना दिया। उनकी किताबों ने अफ्रीका, एशिया और लैटिन अमेरिका के स्वतंत्रता आंदोलनों को गहरा बौद्धिक आधार दिया। फ़ैनन ने बताया कि उपनिवेशवाद केवल बाहरी शासन नहीं होता। वह आत्मा पर क़ब्ज़ा करता है और मनुष्य को पूरी तरह से बदल देता है। उनका लेखन मनोविज्ञान, राजनीति और नैतिकता तीनों को एक साथ जोड़ता है। फ़ैनन का निधन 1961 में, मात्र छत्तीस वर्ष की आयु में, अमेरिका के एक अस्पताल में हुआ। लेकिन उनकी आवाज़ आज भी उपनिवेशिक हिंसा, भेदभाव और अन्याय के ख़िलाफ़ हर आंदोलन में गूंजती है।

साम्राज्यवाद का बुझता दीया: घुटनों पर फ़्रांस और क्रांति की आग में अल्जीरिया का पुनर्जन्म  (UPCOMING)

साम्राज्यवाद का बुझता दीया: घुटनों पर फ़्रांस और क्रांति की आग में अल्जीरिया का पुनर्जन्म (UPCOMING)

Frantz Fanon (फ्रांत्ज़ फ़ैनन)

अंग्रेज़ी से अनुवाद

350
Non-Fiction
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